Friday, October 9, 2026

कान्हा मैं तुमसे कैफ़े में मिलना चाहती हुँ! - Gen zee विनती

 

 



कान्हा मैं Gen zee हुँ, 

मैं मंदिरों से ज़्यादा कैफ़े जाती हुँ। 

कान्हा मैं तुमसे मंदिर में नहीं, 

कैफ़े में मिलना चाहती हुँ।

तुम मंदिर में मिलोगे, मैं तुम्हारी स्तुति करुँगी।

तुम मौन खड़े रहोगे, मैं अपनी अपूर्णताएं गिनूंगी।

न सौंपूँगी अपना हृदय तुम्हें,  न मेरी एकाकी मिटेगी,

बताओ, ऐसी पूजा मुझे क्या ही फलेगी ?!

मैं तुम्हें पूजना नहीं, 

तुम्हारे साथ समय बिताना चाहती हुँ। 

कान्हा मैं तुमसे मंदिर में नहीं,

कैफ़े में मिलना चाहती हुँ।


अनंता सिन्हा 

०८ /१० /२०२६ 



जन्माष्टमी विशेष

कान्हा मैं तुमसे कैफ़े में मिलना चाहती हुँ! - Gen zee विनती

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